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अभिनंदन वर्धमान की फोटो बन गई थी इमरान खान के लिए काल, पीएम मोदी के इस कदम से तुरंत करना पड़ा था रिहा :

संगबाद भास्कर न्यूज़ डेस्क : साल 2019 में बालाकोट एयरस्ट्राइक के बाद पाकिस्तान ने भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को पकड़ लिया था, जिसके बाद उनकी खून से सने हुए मुंह समेत फोटो सामने आई थी।

हालांकि, बाद में पाकिस्तान ने अभिनंदन को छोड़ दिया, लेकिन करोड़ों लोगों में उत्सुकता बनी रही कि आखिर किसके डर से अभिनंदन को पाकिस्तान ने भारत को सौंपा। दरअसल, विंग कमांडर के पकड़े जाने के बाद तत्कालीन रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) चीफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर आईएसआई समकक्ष के सामने रायट एक्ट के बारे में बताया था और कहा था कि अगर अभिनंदन को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई तो पाकिस्तान को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। अभिनंदन की खून वाली फोटो ही पाकिस्तान के लिए एक तरीके से काल बन गई थी, जिसका परिणाम बाद में यह हुआ कि उसे विंग कमांडर को रिहा करना पड़ा।

दो साल पहले, अभिनंदन वर्धमान 27 फरवरी सुबह 10 बजे के करीब जम्मू-कश्मीर में भारतीय सैन्य ठिकानों पर हमला करने आए पाकिस्तानी जेट फाइटर्स को अपने मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमान से खदेड़ते हुए पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में चले गए थे। उन्होंने एक पाकिस्तानी एफ-16 फाइटर जेट को मार भी गिराया था, लेकिन इस दौरान उनका मिग-21 बाइसन भी दुश्मनों के निशाने पर आ गया। अभिनंदन अपने मिग-21 से सफलता पूर्वक इजेक्ट तो कर गए लेकिन उनका पैराशूट पीओके में लैंड हुआ और उन्हें पाकिस्तान की सेना ने अपने कब्जे में ले लिया था।

हमारे सहयोगी अखबार हिन्दुस्तान टाइम्स ने पूर्व वायुसेना, खुफिया विभाग और नेताओं से बात करके यह पता किया है कि आखिर नई दिल्ली और इस्लामाबाद के बीच पर्दे के पीछे ऐसा क्या हुआ था, जिससे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान को रिहा करने के लिए मजबूर होना पड़ा। इमरान खान ने 28 फरवरी को पाकिस्तानी संसद में घोषणा करते हुए अपने फैसले को शांति के लिए लिया गया बताया था।

विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान एक मार्च को भारी सुरक्षा वाली वाघा-अटारी सीमा से होते हुए स्वदेश लौटे थे। पाकिस्तानी हिरासत में बिताए गए 60-घंटे के दौरान, दोनों देश आमने-सामने की स्थिति में थे और हालात काफी तनावपूर्ण बन गए थे। इस दौरान, पाकिस्तानी सेना ने एक प्रोपेगैंडा वीडियो जारी किया, जिसमें अभिनंदन को अपनी हिरासत में दिखा गया। एक जगह अभिनंदन के चेहरे पर खून भी था। उन्होंने पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों के पूछे गए सवालों का बेहद ही शांतिपूर्ण और गरिमापूर्ण ढंग से जवाब दिया।

पाकिस्तान द्वारा विंग कमांडर अभिनंदन की शुरुआती फोटो साझा करने के बाद, भारत ने अभिनंदन को रिहा करने के लिए तेजी से और निर्णायक रूप से काम करने का फैसला किया। हिन्दुस्तान टाइम्स ने पता किया है कि जैसे ही पीएम नरेंद्र मोदी ने अभिनंदन की खून वाली फोटो देखी, उन्होंने तुरंत ही भारतीय खुफिया प्रमुख से पाकिस्तान को स्पष्ट रूप से बात करने के लिए कहा कि अगर इस्लामाबाद ने अभिनंदन को नुकसान पहुंचाया तो भारत किसी भी हद तक जाएगा। साथ ही विंग कमांडर की तत्काल रिहाई की मांग की गई। पाकिस्तान को पीएम मोदी का मैसेज था, ”हमारे पास हथियार दिवाली के लिए नहीं रखे हैं।”

सिक्योर लाइन के जरिए पीएम मोदी के इस मैसेज को तत्कालीन रॉ प्रमुख अनिल धस्माना ने उस समय के आईएसआई समकक्ष लेफ्टिनेंट जनरल सैयद असीम मुनीर अहमद शाह को दिया। धस्माना ने इतने स्पष्ट रूप से कहा कि आईएसआई प्रमुख भी हैरान रह गए। रॉ प्रमुख ने उनसे कहा था कि अगर विंग कमांडर अभिनंदन को सुरक्षित भारत को नहीं लौटाया गया तो इस्लामाबाद को गंभीर परिणाम देखने पड़ेंगे। सशस्त्र बलों को राजस्थान सेक्टर में मोबाइल पृथ्वी बैलिस्टिक मिसाइल बैटरी तैयार करने का आदेश दिया गया।

28 फरवरी को नेशनल असेंबली में विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई की घोषणा करते हुए अपने संक्षिप्त बयान में, प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा था कि उन्होंने पिछले दिन पीएम नरेंद्र मोदी के साथ बात करने की कोशिश की थी, लेकिन हो नहीं पाई। विंग कमांडर अभिनंदन की रिहाई के बारे में पहली पुष्टि इमरान खान के ऐलान से कुछ समय पहले हो सकी थी। ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ को पता चला है कि आईएसआई प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शाह ने 28 फरवरी की सुबह भारतीय वायुसेना के पायलट को रिहा करने के फैसले से अवगत कराते हुए रॉ प्रमुख को एक गुप्त पत्र भेजा था। पीएम मोदी को पत्र के बारे में बताया गया था। वहीं, बाद में आईएसआई प्रमुख को सिर्फ आठ महीने की सेवा के बाद जून 2019 में उनके पद से हटा दिया गया था और उनकी जगह एक कट्टर लेफ्टिनेंट जनरल फैज को नियुक्त किया गया था।

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