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कैसे आई उत्तराखंड में ऐसी आपदा? ग्लेशियर टूटा या कोई अंदरूनी झील, जांच में होगा खुलासा: वैज्ञानिक :

संगबाद भास्कर न्यूज़ डेस्क : उत्तराखंड के देहरादून स्थित वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ. कलाचंद सैन ने कहा कि उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर टूटा, हिमस्खलन या भूस्खलन हुआ या फिर कोई अंदरूनी झील टूटी, इसकी जांच की जा रही है।

वैज्ञानिकों की टीम वहां पहुंच चुकी है तथा अगले कुछ दिनों में तथ्यों के आधार पर अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचेगा। हिन्दुस्तान से बातचीत में उन्होंने कहा कि आरंभिक जानकारियों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि जाड़े के मौसम में बर्फ सख्त रहती है इसलिए उसके टूटने की संभावना कम रहती है। जबकि गर्मी और बरसात में बर्फ ढीली रहती है इसलिए इस तरह की आशंका ज्यादा रहती है। इस बीच डीआरडीओ की चंडीगढ़ स्थित स्नो एंड एवलांच स्टडी स्टेबलिसमेंट (एसएएसई) के वैज्ञानिकों की एक टीम भी चमोली पहुंची है।

बता दें कि उत्तराखंड में प्राकृतिक कहर से लोगों की जान पर बनी रहती है। ताजा मामले में चमोली जिले के रैनी में रविवार सुबह ग्लेशियर टूट गया। बताया जा रहा है कि ग्लेशियर टूटने से धौली नदी में बाढ़ आ गई है। इससे चमोली से हरिद्वार तक खतरा बढ़ गया है। भारतीय वायु सेना की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार चमोली जिले में ग्लेशियर के फटने के बाद ऋषि गंगा परियोजना के रूप में पहचाने जाने वाला तपोवन हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर डैम पूरी तरह से धवस्त हो गया।

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