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पुडुचेरी में कांग्रेस को लगे झटके का तमिलनाडु पर पड़ सकता है असर, समीकरण साधने की कोशिश करेगी भाजपा :

संगबाद भास्कर न्यूज़ डेस्क : विधानसभा चुनावों के ठीक पहले पुडुचेरी में कांग्रेस सरकार के पतन से भाजपा को वहां पर तो लाभ मिलने की स्थिति बनी ही है साथ ही तमिलनाडु में भी वह इसका फायदा उठाने की कोशिश करेगी।

पुडुचेरी की राजनीति काफी हद तक तमिलनाडु से प्रभावित होती है और वहां पर द्रमुक और अन्नाद्रमुक का खासा प्रभाव है। इस घटनाक्रम से द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को झटका लगा है, जबकि अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन को राहत मिली है।

पुडुचेरी में जो स्थितियां हैं उसमें वहां पर राष्ट्रपति शासन लगना तय माना जा रहा है। ऐसे में वहां की उप राज्यपाल का प्रभार संभाल रही तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुन्दरराजन की भूमिका अहम होगी। सुंदरराजन मूल रूप से तमिलनाडु की है और वह लोगों से सीधा संवाद कर भाजपा की मददगार हो सकती हैं। साथ ही तमिलनाडु के लिए भी एक संदेश दे सकती हैं।

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पुडुचेरी में कांग्रेस को लगे झटके का तमिलनाडु पर पड़ सकता है असर, समीकरण साधने की कोशिश करेगी भाजपा
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विशेष संवाददाता, हिन्दुस्तान,नई दिल्ली। | Published By: Himanshu Jha
Updated: Tue, 23 Feb 2021 06:39 AM

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विधानसभा चुनावों के ठीक पहले पुडुचेरी में कांग्रेस सरकार के पतन से भाजपा को वहां पर तो लाभ मिलने की स्थिति बनी ही है साथ ही तमिलनाडु में भी वह इसका फायदा उठाने की कोशिश करेगी। पुडुचेरी की राजनीति काफी हद तक तमिलनाडु से प्रभावित होती है और वहां पर द्रमुक और अन्नाद्रमुक का खासा प्रभाव है। इस घटनाक्रम से द्रमुक-कांग्रेस गठबंधन को झटका लगा है, जबकि अन्नाद्रमुक-भाजपा गठबंधन को राहत मिली है।

पुडुचेरी में जो स्थितियां हैं उसमें वहां पर राष्ट्रपति शासन लगना तय माना जा रहा है। ऐसे में वहां की उप राज्यपाल का प्रभार संभाल रही तेलंगाना की राज्यपाल तमिलसाई सुन्दरराजन की भूमिका अहम होगी। सुंदरराजन मूल रूप से तमिलनाडु की है और वह लोगों से सीधा संवाद कर भाजपा की मददगार हो सकती हैं। साथ ही तमिलनाडु के लिए भी एक संदेश दे सकती हैं।

भाजपा के एक प्रमुख नेता ने कहा है कि पुडुचेरी से से ज्यादा महत्वपूर्ण तमिलनाडु है। पुडुचेरी में जिस तरह कांग्रेस और द्रमुक का गठबंधन सरकार बचाने में असफल रहा है उससे तमिलनाडु के लोगों में भी इस गठबंधन को लेकर अविश्वास पैदा होगा। दूसरी तरफ सरकार विरोधी माहौल से जूझ रही अन्नाद्रमुक को इससे राहत मिलेगी, क्योंकि भाजपा भी अब उसके गठबंधन में शामिल है। इसलिए दोनों दल विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद कर सकते हैं।

तमिलनाडु के चुनाव इस बार दोनों प्रमुख दलों द्रमुक और अन्नाद्रमुक के नए नेतृत्व के बीच हो रहे हैं। ऐसे में वहां की जनता के मूड का आकलन कर पाना मुश्किल हो रहा है। भाजपा का सारा दारोमदार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के चेहरे, केंद्र की योजनाओं और अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन में बने समीकरणों पर टिका हुआ है। हालांकि भाजपा नेता मानते हैं कि सरकार विरोधी माहौल होने पर अन्नाद्रमुक के साथ रहने पर उसे भी नुकसान हो सकता है। हालांकि उनका दावा है कि द्रमुक और कांग्रेस के गठबंधन को लेकर भी बहुत ज्यादा उत्साह वाली स्थिति नहीं है।

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