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लालू प्रसाद की जमानत याचिका पर हाईकोर्ट की सुनवाई टली, अब 19 फरवरी को होगी :

संगबाद भास्कर न्यूज़ डेस्क : राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद को जमानत के लिए अभी इंतजार करना होगा। झारखंड हाईकोर्ट में चारा घोटाले के मामले में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की जमानत याचिका पर सुनवाई टल गई है। झारखंड हाईकोर्ट अब जमानत याचिका पर 19 फरवरी को सुनवाई करेगा।

चारा घोटाले के दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में लालू की ओर से आधी सजा काट लेने के दावे का सीबीआई ने विरोध किया। सीबीआई की ओर से कहा गया कि लालू प्रसाद ने जो दावा किया है, वह सही नहीं है। उनकी आधी सजा पूरी होने में अभी समय है। इसके बाद जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने लालू प्रसाद और सीबीआई से हिरासत की कुल अवधि की सत्यापित कॉपी पेश करने का निर्देश दिया और सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित कर दी।

लालू प्रसाद का पक्ष रखते हुए वरीय अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि लालू प्रसाद चारा घोटाले के मामले में 42 माह जेल में बिता चुके हैं। अब तक मिली सजा की आधी अवधि आठ फरवरी को पूरी कर हो चुकी है। इस कारण उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। इस मामले में लालू प्रसाद ने 11 जुलाई, 1997 को सरेंडर किया और 29 अक्टूबर 1997 को जमानत मिली। इसका मतलब 3 महीने से ज्यादा दिनों तक वह जेल में रहे। चारा घोटाले में लालू जब जेल गए तो उनकी तरफ से प्रोडक्शन दिया गया है। इसलिए अब लालू द्वारा जितनी भी अवधि न्यायिक हिरासत में बिताई गई है, उसे जोड़ा जाए।

सीबीआई की ओर से अदालत को बताया गया कि 1997 में लालू सिर्फ 91 दिनों तक ही जेल में रहे थे। अब तक सिर्फ 27 महीने 6 दिन की अवधि ही लालू द्वारा न्यायिक हिरासत में बिताई गई है। इसलिए अभी उनकी आधी अवधि बीतने में करीब 28 दिन कम हैं। इस कारण जमानत नहीं दी जा सकती है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने लालू प्रसाद और सीबीआई को हिरासत की कुल अवधि की सत्यापित कॉपी पेश करने का निर्देश देते हुए सुनवाई 19 फरवरी को निर्धारित की।

चारा घोटाले के पांच मामले चल रहे हैं लालू पर
आपको बता दें कि लालू यादव के खिलाफ चारा घोटाले के पांच मामले चल रहे हैं। चार मामलों में उन्हें सजा मिली है। तीन मामलों में उन्हें पहले ही जमानत मिल गयी है। एक मामले में अभी सीबीआई कोर्ट में सुनवाई जारी है। दुमका कोषागार से अवैध निकासी के मामले में होने वाली इस सुनवाई में को सीबीआई कोर्ट ने दो अलग-अलग धाराओं में सात-सात साल कैद की सजा सुनायी है।

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