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India-China Standoff: पूर्वी लद्दाख में चालाकी दिखाने वाला ड्रैगन दे रहा ज्ञान, बोला- सीमा विवाद को उचित जगह पर रखें :

संगबाद भास्कर न्यूज़ डेस्क : भारत और चीन के बीच एलएसी पर सीमा विवाद की शुरुआत हुए कुछ महीने बाद एक साल पूरा हो जाएगा। पिछले साल अप्रैल से शुरू हुए विवाद के बाद दोनों पक्षों ने कई दौर की बैठक की, लेकिन तनाव पूरी तरह से कम नहीं हो सका।

वहीं, चीनी राजदूत सन वेइदॉन्ग का कहना है कि भारत और चीन, दोनों को समस्याओं का समाधान करने के लिए आगे कदम बढ़ाना होगा। उन्होंने कहा कि दोनों ही देशों को सीमा विवाद को ‘द्विपक्षीय संबंधों में एक उपयुक्त स्थान’ पर रखना होगा। पॉलिसी क्रॉनिकल वेबसाइट में प्रकाशित हुए ‘चाइना एंड द वर्ल्ड इन द इयर ऑफ द ऑक्स’ नामक आर्टिकल में सन ने दोनों पक्षों को एक-दूसरे का सम्मान करने के लिए भी कहा है। इसके साथ ही आपसी विश्वास बढ़ाने की बात की है।

चीनी राजदूत की यह टिप्पणी भारतीय नेतृत्व द्वारा वास्तविक नियंत्रण रेखा के लद्दाख सेक्टर में रखी गई अपनी स्थिति के खिलाफ जाती है। भारतीय पक्ष ने कहा है कि चीन के साथ समग्र संबंधों का विकास हाल के दशकों में सीमा प्रबंधन पर कई समझौतों के माध्यम से एलएसी में बनाई गई शांति पर आधारित है। इससे पहले 28 जनवरी को विदेश मंत्री जयशंकर ने पूर्वी लद्दाख गतिरोध के संबंध में कहा था कि पिछले साल हुई घटनाओं ने दोनों देशों के संबंधों को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। जयशंकर ने कहा कि जो समझौते हुए हैं, उनका पूरी तरह से पालन किया जाना चाहिए। वास्तविक नियंत्रण रेखा का कड़ाई से पालन और सम्मान किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा था कि इसने (लद्दाख की घटनाओं ने) न सिर्फ सैनिकों की संख्या को कम करने की प्रतिबद्धता का अनादर किया, बल्कि शांति भंग करने की इच्छा भी प्रदर्शित की। चीन के साथ संबंधों पर उन्होंने कहा कि संबंधों को आगे तभी बढ़ाया जा सकता है जब वे आपसी सम्मान एवं संवेदनशीलता तथा आपसी हित जैसी परिपक्वता पर आधारित हों।

चीनी राजदूत ने भारत और चीन को बड़े विकासशील देशों में बताते हुए आर्टिकल में लिखा, ”हमें सीमा संबंध को द्विपक्षीय संबंधों में सही जगह पर रखना चाहिए। तर्कसंगत और रचनात्मक तरीके से मतभेदों को दूर करना चाहिए और हमारे बीच के मतभेदों को विवाद नहीं बनने देना चाहिए।” उन्होंने आगे कहा कि चीन और भारत के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वे एक-दूसरे का सम्मान करें, आपसी विश्वास बढ़ाएं, मतभेदों को दूर करते हुए आम जमीन की तलाश करें।

उन्होंने आर्टिकल में आगे लिखा कि दोनों देशों को एक साथ चलना चाहिए और एक दूसरे को अपने सपनों को पाने में मदद करनी चाहिए। नए साल में चीन-भारत संबंधों की सही दिशा में चलना होगा और नेताओं की आम सहमति को लागू करना चाहिए कि चीन और भारत एक-दूसरे के साझेदार, न कि विरोधी या एक-दूसरे के लिए खतरा हैं। इसके अलावा, सन ने कोरोना से लड़ाई, इकॉनमी में सुधार आदि के मुद्दे पर भी दोनों देशों को आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए कहा।

मालूम हो कि भारत और चीन पिछले साल अप्रैल से ही पैदा हुए तनाव को खत्म करने में कामयाब नहीं हो सके हैं। दोनों ही देशों के बीच अब तक कई दौर की कूटनीतिक और सैन्य स्तर की वार्ताएं हो चुकी हैं। भारत का इन बातचीत में सीधा स्टैंड रहा है कि चीन को अप्रैल की शुरुआत वाली स्थिति में लौटना ही होगा। वहीं, जून महीने में दोनों के रिश्ते तब और बिगड़ गए थे, जब 1975 के बाद पहली बार एलएसी पर किसी सैनिक की शहादत हुई थी। गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे, जबकि चीन के भी कई सैनिक मारे गए थे।

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